- दून अस्पताल में ‘स्कैन एंड शेयर’ ने बदली ओपीडी की सूरत
- 881 ने डिजिटल माध्यम से किया रजिस्ट्रेशन, समय की भारी बचत
- पंजीकरण प्रभारी बोले : मरीजों में ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन को लेकर दिख रहा है उत्साह
नीरज पाल
देहरादून। राजकीय दून मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल की ओपीडी में पिछले एक सप्ताह से लागू की गई ‘स्कैन एंड शेयर’ व्यवस्था मरीजों के लिए राहत लेकर आई है। इस डिजिटल पहल से जहां ओपीडी की व्यवस्था अधिक सुचारु हुई है, वहीं अस्पताल में उपचार कराने आ रहे मरीजों और तीमारदारों के चेहरों पर संतोष भी नजर आने लगा है।
मंगलवार को दून अस्पताल की ओपीडी में कुल 1899 मरीज पहुंचे। इनमें से 881 मरीजों ने अपने मोबाइल फोन के जरिए डिजिटल पंजीकरण कराया। इससे लंबी कतारों से राहत मिली और मरीजों का समय भी काफी हद तक बचा।
पंजीकरण प्रभारी विनोद नैनवाल ने बताया कि मरीजों में ऑनलाइन पंजीकरण को लेकर काफी उत्साह देखा जा रहा है। उन्होंने बताया कि उनकी टीम रोजाना पंजीकरण काउंटर के बाहर लोगों को आभा ऐप और क्यूआर कोड के फायदे समझा रही है, जिससे अधिक से अधिक लोग इस सुविधा का लाभ उठा सकें।
शुरुआती दिनों में लोगों को थोड़ी बहुत परेशानी जरूर हुई, लेकिन अब आभा ऐप के जरिए पर्चा बनवाना मरीजों को आसान लगने लगा है। खास बात यह है कि परिवार का एक सदस्य अपने मोबाइल फोन से ही परिवार के अन्य छह सदस्यों के लिए भी टोकन जनरेट कर सकता है। यानी एक फोन से पूरे परिवार के ओपीडी पर्चे बनाए जा सकते हैं।
ऐसे करें इस्तेमाल
डिजिटल पंजीकरण के लिए सबसे पहले मोबाइल में ड्राइवकेस (Driefcase) ऐप डाउनलोड करना होता है। इसके बाद सामान्य जानकारी भरने पर आभा आईडी जनरेट हो जाती है। इस आईडी को स्कैन एंड शेयर करने पर टोकन नंबर मिल जाता है। इसी टोकन को दिखाकर ओपीडी पंजीकरण काउंटर से पर्चा लिया जा सकता है। यह प्रक्रिया घर से ही पूरी कर अस्पताल आने पर कुछ ही सेकंड में ओपीडी पर्चा प्राप्त किया जा सकता है।
आठ काउंटरों पर सुविधा
दून अस्पताल की ओपीडी में कुल आठ काउंटरों पर ‘स्कैन एंड शेयर’ सुविधा उपलब्ध कराई गई है। इनमें एक आभा काउंटर, चार सामान्य काउंटर के अलावा प्रथम और तृतीय तल पर स्थित पंजीकरण काउंटर भी शामिल हैं। अस्पताल प्रशासन का मानना है कि आने वाले दिनों में डिजिटल पंजीकरण से ओपीडी व्यवस्था और अधिक बेहतर होगी।
डिजिटल पंजीकरण ने न केवल सुविधा, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं की दक्षता भी बढ़ाई है। यह मरीज-केंद्रित और तकनीक-सक्षम पहल राज्य के अन्य अस्पतालों के लिए भी उदाहरण है। मरीज इस सुविधा का अधिक से अधिक लाभ उठाएं और अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं को सरल और सुचारू बनाने में सहयोग करें।
_ डॉ आर राजेश कुमार, स्वास्थ्य सचिव