उत्तराखंड

देवभूमि उत्तराखंड यूनिवर्सिटी ने मनाया अंतर्राष्ट्रीय मिलेट वर्ष 2023, मंत्री बोले : दुनिया की ज़रुरत है ‘मोटा अनाज’

 छात्रों द्वारा मोटे अनाज से बनाए गए पकवानों को कृषि मंत्री ने सराहा  

मोटे अनाज की उपयोगिता को वैश्विक पहचान दिलाने के उद्देश्य से वर्ष 2023 को अंतर्राष्ट्रीय मिलेट वर्ष घोषित किया गया है, जिसके उपलक्ष्य में देवभूमि उत्तराखंड यूनिवर्सिटी में अंतर्राष्ट्रीय मिलेट वर्ष मनाया गया। इस मौके पर कृषि मंत्री गणेश जोशी ने मोटे अनाज के प्रति जागरूकता हेतु स्मारिका पुस्तक का विमोचन किया और कहा कि मोटा अनाज आज विश्व की ज़रुरत बन चुका है।

शुक्रवार को देवभूमि उत्तराखंड यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ़ एलायड साइंसेज़ द्वारा “अंतर्राष्ट्रीय मिलेट वर्ष” उत्सव मनाया गया, जिसके अंतर्गत “मिलेट: हमारे शरीर का पोषण, हमारे ग्रह का पोषण” विषय पर आधारित विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया।

इस दौरान मुख्य अतिथी कृषि मंत्री गणेश जोशी ने मोटे अनाज के प्रति जागरुक करती स्मारिका पुस्तक का विमोचन किया और कहा कि स्वस्थ जीवन शैली के लिए मोटा अनाज अत्यंत महत्वपूर्ण है, जिसका उपयोग हमें अपने दैनिक आहार में बढ़ाना होगा, ताकि पोषण संबंधी लाभों सहित मोटे अनाज पर निर्भर किसानों की आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाया जा सके।

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आज मोटा अनाज विश्व की ज़रुरत बन चुका है और यही कारण है कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के प्रयासों से संयुक्त राष्ट्र ने वर्ष 2023 को अंतर्राष्ट्रीय मिलेट वर्ष घोषित किया है। इस दौरान उन्होंने स्कूल ऑफ़ होटल मैनेजमेंट एंड टूरिज्म द्वारा आयोजित मोटे अनाज पर आधारित फ्यूज़न फ़ूड प्रतियोगिता में छात्रों की बढ़चढ़कर भागीदारी की सराहना की और कहा कि मोटे अनाज के प्रति छात्रों को जागरूक करने के लिए मैं विश्वविद्यालय प्रबंधन को बधाई देता हूँ।

इसके अलावा जोशी ने 15 स्वयं सहायता समूहों द्वारा लगाए गए मोटे अनाज और उनसे तैयार उत्पादों के स्टॉल्स का जायज़ा लिया और उनकी सराहना की। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलाधिपति श्री संजय बंसल ने कृषि मंत्री गणेश जोशी का आभार व्यक्त किया और कहा कि सरकार के प्रयासों को सफल बनाने के लिए देवभूमि उत्तराखंड यूनिवर्सिटी सदैव तत्पर है।

वहीं, विश्वविद्यालय कुलपति प्रो. डॉ. प्रीति कोठियाल ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय मिलेट वर्ष को मनाने का उद्देश्य इसे छात्रों का आन्दोलन बनाना है ताकि स्वस्थ समाज का निर्माण और देश का तेज़ी से आर्थिक विकास संभव हो सके।

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इस दौरान इंडियन काउंसिल ऑफ़ एग्रीकल्चर रीसर्च के अंतर्गत  इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ मिलेट रीसर्च के विशेषज्ञों द्वारा संगोष्ठी के माध्यम से मिलेट यानी मोटा अनाज की उपयोगिता पर प्रकाश डाला गया। कार्यक्रम में उपकुलपति डॉ. आरके त्रिपाठी, डीन एकेडेमिक्स अफेयर्स डॉ. संदीप शर्मा, मुख्य सलाहकार डॉ. एके जायसवाल, डीन स्कूल ऑफ़ एलायड साइंसेज़ डॉ. नबील अहमद सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति, शिक्षक और छात्र उपस्थित रहे|

‘सुपर फ़ूड’ है मोटा अनाज – वैज्ञानिक
‘अंतर्राष्ट्रीय मिलेट वर्ष 2023’ उत्सव को मना रहे देवभूमि उत्तराखंड यूनिवर्सिटी द्वारा आयोजित संगोष्ठी के दौरान डिपार्टमेंट ऑफ़ माइक्रोबायोलॉजी इंडियन एग्रीकल्चर रीसर्च इंस्टिट्यूट, दिल्ली (आईसीएआर) के वरिष्ठ वैज्ञानिक प्रो. सुनील पब्बी ने कहा कि मोटा अनाज यानी मिलेट्स एक ऐसा सुपर फ़ूड है, जिसमें प्रोटीन, फायबर, विटामिन, कैल्शियम, आयरन, जिंक, मैग्नीशियम सहित विभिन्न अन्य पोषक तत्व होते हैं जो शरीर को पूर्ण रूप से स्वस्थ बनाए रखने में हमारी मदद करते हैं।

ये बात गाँव के लोग जानते थे और इसका भरपूर इस्तेमाल करते थे, लेकिन पश्चिमी संस्कृति के प्रभाव में मोटा अनाज ग्रामीण खाना कहलाया जाने लगा धीरे धीरे उसकी पैदावार ख़त्म होती चली गयी। लेकिन, अब हमें मोटा अनाज के प्रति दुनिया को जागरूक करना होगा। वहीं, इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ मिलेट रीसर्च, हैदराबाद  के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. पी राजेंद्र कुमार ने कहा कि मिलेट्स का दैनिक उपयोग मोटापा तो कम करता ही है साथ ही ये कैंसर सेल्स को भी ख़त्म करता है।

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इसमें मौजूद भरपूर पाचक तत्व  पेट की बीमारियों से दूर रखते हैं और प्रतिरोधक क्षमता को बेहतर बनाते हैं| कृषि मंत्रालय और कृषक कल्याण, भारत सरकार में मार्केटिंग ऑफिसर अभय प्रताप ने कहा कि कम पानी, उर्वरक और कीटनाशकों के साथ कम उपजाऊ मिट्टी में भी मिलेट्स उगाये जा सकते हैं।

उच्च तापमान में भी इनकी पैदावार अच्छी होती है इसलिए इन्हें ‘क्लाइमेट स्मार्ट’ अनाज भी कहा जाता है| ये इनकी खासियतें हैं, जो आर्थिक दृष्टी से किसानों सहित देश के आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।

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