- श्वेतपत्र जारी कर जनहानि के सही आंकड़े दें सरकार : धस्माना
नीरज पाल, संवाददाता
देहरादून। उत्तराखंड की सियासत में भाजपा नेता कर्नल अजय कोठियाल के एक वायरल वीडियो ने नए विवाद को जन्म दे दिया है। इस बीच प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष (संगठन) सूर्यकांत धस्माना ने साफ कहा कि कांग्रेस, कर्नल कोठियाल को राजनीतिक चश्मे से नहीं, बल्कि केदारनाथ आपदा के बाद किए गए उनके पुनर्निर्माण कार्यों के आधार पर ही देखती है।
धस्माना ने कहा कि केदारनाथ आपदा के बाद कांग्रेस सरकार ने कोठियाल को जिस बड़ी जिम्मेदारी से नवाजा था, उसे उन्होंने पूरी निष्ठा और ईमानदारी से निभाया था। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो कांग्रेस की ओर से जारी नहीं किया गया। वीडियो किसी ने डाल दिया और उसमें कही गई बातों को गंभीरता से इसलिए लिया गया क्योंकि हम आज भी उन्हें वही कर्मयोगी मानते हैं, जिन्होंने केदारनाथ के पुनर्निर्माण में बड़ा योगदान दिया
उन्होंने कहा कि यदि वायरल वीडियो में किया गया दावा, जिसमें कहा गया है कि ‘147 लोग आज भी मलबे में दबे हैं और 5 अगस्त के बाद से कोई काम नहीं हुआ’ तो कर्नल कोठियाल का वास्तविक बयान नहीं है, तो उन्हें तत्काल इसका खंडन करना चाहिए। आजकल तो नेता तुरंत कह देते हैं कि यह एआई जनरेटेड है। अगर यह बयान उनका नहीं है, तो खुलकर कहें।
धस्माना ने कहा कि यदि यह बयान सच में कोठियाल का है तो भाजपा को इसका जवाब देना होगा, क्योंकि यह उनकी ही सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा करता है। भाजपा द्वारा कांग्रेस पर सवाल उठाए जाने पर उन्होंने कहा कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल के नेतृत्व में पार्टी का हाई-पावर प्रतिनिधिमंडल धराली में आपदा प्रभावितों से मिलने पहुंच चुका है। उन्होंने याद दिलाया कि 2025 की धराली आपदा के दौरान करण माहरा पैदल, जान जोखिम में डालकर मौके पर पहुंचे थे, जिसका रिकॉर्ड आज भी सोशल मीडिया पर उपलब्ध है।
धस्माना ने सरकार को चुनौती देते हुए कहा कि कांग्रेस पहले दिन से मांग कर रही है कि सरकार जनहानि के सही आंकड़े सामने रखे। अगर सरकार अपने काम पर भरोसा रखती है तो 2025 में हुई सभी आपदाओं, धराली, हर्षिल, धारचूला, थराली, देवाल, पौड़ी और चारधाम मार्ग पर हुई मौतों पर श्वेतपत्र जारी करे।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस अब भी कर्नल कोठियाल को सम्मान की दृष्टि से देखती है, लेकिन राजनीतिक दलों में आने के बाद कई मजबूरियां होती हैं। “जैसा खाए अन्न, वैसा हो जाए मन।
