- देहरादून में ओएनजीसी 1982 बैच का भव्य पुनर्मिलन समारोह आयोजित
देहरादून। देहरादून के पुनर्नवा रिसोर्ट में 21–22 मार्च 2026 को 44 वर्षों बाद ओएनजीसी के 1982 बैच के ड्रिलिंग डिसिप्लिन के ग्रेजुएट इंजीनियर्स का भव्य पुनर्मिलन समारोह आयोजित किया गया। इस अवसर पर देश विदेशों के विभिन्न हिस्सों से आए, अनेक पूर्व अधिकारी एवं तकनीकविद अपने जीवनसाथियों सहित शामिल हुए।

ओएनजीसी के 1982 के वेधन विभाग के इस सबसे बड़े बैच के सदस्यों ने ओएनजीसी तथा इसके बाहर देश-विदेश में अपनी नेतृत्व क्षमता और तकनीकी दक्षता का लोहा मनवाया है और देश के साथ साथ समूचे विश्व में अपनी सेवाएं देते हुए अनेक उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। बावजूद इसके, इस समारोह में सभी सहभागी बिना किसी पद या प्रतिष्ठा के दंभ के, केवल मित्रों की तरह सहज और आत्मीय भाव से शामिल हुए।
कार्यक्रम के अंतर्गत ओएनजीसी के ड्रिलिंग एवं वेल इंजीनियरिंग इंस्टीट्यूट तथा तेल भवन स्थित संग्रहालय का भ्रमण भी किया गया, जो प्रतिभागियों के परिवारजनों के लिए विशेष याद और आकर्षण का केंद्र रहा।
समारोह के दौरान प्रतिभागियों ने अपने स्वर्णिम अतीत की यादों को ताजा किया और वर्षों बाद एक-दूसरे से गले मिलकर भावुक क्षणों का अनुभव किया। सेवानिवृत्त साथियों में एक बार फिर युवावस्था जैसा उत्साह और ऊर्जा देखने को मिली।
दोनों दिनों की संध्या में संगीतमय एवं रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया, जिसने पूरे माहौल को उल्लासपूर्ण बना दिया।
ओएनजीसी के सबसे पहले और अभूतपूर्व पुनर्मिलन समारोह को संयोजित करने में ओएनजीसी के देश के विभिन्न हिस्सों में रह रहे पूर्व अधिकारी क्रमशः दिल्ली निवासी अनिल माथुर एवं योगेंद्र कुमार श्रीवास्तव, मुंबई निवासी अनूप दुआ, राजमुंद्री (आंध्र प्रदेश) के सत्यनारायण, अहमदाबाद के देशराज, कलकत्ता के सत्यव्रत मुखोपाध्याय, कोटा के वेदप्रकाश ने जहां सुदूर बैठकर अपना योगदान दिया, वहीं देहरादून स्थित ओएनजीसी के जुझारू अधिकारी राजीव धूपर और अनिल सिंह ने कार्यक्रम के व्यवस्थापक विनय कुमार गुप्ता के साथ मिलकर इसे सफलतापूर्वक संयोजित करने में और एक नजीर स्थापित करने में अपनी भूमिका निभाई।
कार्यक्रम के समापन पर सभी उपस्थित सदस्यों ने यह संकल्प लिया कि इस परंपरा को आगे भी जारी रखते हुए वे हर वर्ष इसी प्रकार मिलते रहेंगे।
