- नर्सिंग सेवा संघ ने सरकार को दिया दो दिन का अल्टीमेटम
नीरज पाल, संवाददाता
देहरादून। नर्सिंग अधिकारियों की भर्ती प्रक्रिया में बदलाव को लेकर नर्सिंग सेवा संघ ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। संघ ने वर्षवार (सीनियरिटी) आधारित भर्ती व्यवस्था खत्म कर परीक्षा आधारित चयन लागू किए जाने को नर्सिंग समुदाय के साथ वादाखिलाफी बताया है।
उत्तरांचल प्रेस क्लब में आयोजित प्रेसवार्ता में संघ के संरक्षक विजय चौहान ने कहा कि अब तक सभी नर्सिंग भर्तियां वर्षवार होती आई हैं। लेकिन 17 व 18 नवंबर को चिकित्सा शिक्षा विभाग और स्वास्थ्य विभाग द्वारा परीक्षा आधारित विज्ञप्ति जारी कर सरकार ने वर्षों पुरानी व्यवस्था को झटका दिया है। उन्होंने कहा कि पहले ही निजी क्षेत्र में संघर्ष कर रहे नर्सिंग अधिकारियों पर यह नया बोझ है।
चौहान ने बताया कि 2020 के नियम संशोधन के विरोध के बाद सरकार ने तीन हजार पदों को वन टाइम सेटलमेंट तहत वर्षवार भरने का निर्णय लिया था, जबकि 2023 में 1564 पदों की विज्ञप्ति भी इसी आधार पर निकली थी। इसके बावजूद मार्च 2024 में 1455 पदों को अलग से निकालकर टू-टाइम सेटलमेंट कर दिया गया। “जब सरकार वर्षवार भर्ती मान चुकी है, तो अब परीक्षा का औचित्य क्या?
संघ की अध्यक्ष लीला चौहान ने बताया कि 17 नवंबर को 587 पदों और 18 नवंबर को 103 बैकलॉग पदों के लिए परीक्षा आधारित विज्ञापन जारी किया गया। उनका आरोप है कि परीक्षा प्रणाली में कोचिंग करने वाले अभ्यर्थी आगे रहेंगे, जबकि नौकरीरत नर्सिंग अधिकारी समान प्रतिस्पर्धा नहीं कर पाएंगी। संघ ने विज्ञप्ति वापस लेने और भर्ती को वर्षवार करने की मांग की है।
चौहान ने अंत में सरकार को दो दिन का अल्टीमेटम देते हुए कहा कि अगर फैसला न हुआ तो पूरे प्रदेशभर में राज्यव्यापी आंदोलन किया जाएगा।
यह है प्रमुख मांग :-
- 690 पदों की परीक्षा आधारित विज्ञप्ति तत्काल वापस ली जाए।
- दोनों विभागों में नए पद सृजित कर कम से कम 1500 पदों की वर्षवार भर्ती निकाली जाए।
- ओवर-एज अभ्यर्थियों को दो वर्ष की आयु छूट दी जाए।
- 11 मार्च 2024 के बाद बाहरी राज्यों से हुए संदिग्ध रजिस्ट्रेशन को नई भर्ती से बाहर रखा जाए।
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