- माइनस 9 डिग्री में भी अडिग ‘औली बचाओ मुहिम’,
- तीसरे दिन भी जारी धरना, अनशन की चेतावनी
ज्योतिर्मठ। उत्तराखंड की प्रमुख शीतकालीन पर्यटन स्थली और विंटर स्पोर्ट्स की राजधानी औली में स्थानीय पर्यटन हितधारकों द्वारा चलाया जा रहा “औली बचाओ मुहिम” के तहत धरना प्रदर्शन तीसरे दिन भी जारी रहा। कड़ाके की ठंड और माइनस 9 डिग्री से नीचे तापमान के बावजूद पर्यटन कारोबारी अंतरराष्ट्रीय नंदा देवी स्कीइंग स्लोप के समीप टेंट गाड़कर बीते 72 घंटों से धरने पर डटे हुए हैं।
स्थानीय पर्यटन कारोबारियों का कहना है कि शासन को दिया गया तीन दिन का अल्टीमेटम आज शाम तक पूरा हो जाएगा। यदि अब भी दोनों मांगों पर कोई सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन को और उग्र रूप दिया जाएगा। इसके तहत व्यापार मंडल, टैक्सी यूनियन सहित अन्य स्टेक होल्डरों को भी आंदोलन से जोड़ा जाएगा तथा अनशन पर बैठने का विकल्प भी खुला रखा गया है।
धरना दे रहे पर्यटन कारोबारी विवेक पंवार, अंशुमन बिष्ट, महेंद्र भुजवान, जयदीप भट्ट, पवन सिंह और नंदन सिंह मार्तोलिया ने बताया कि उनकी दो सूत्रीय प्रमुख मांगें हैं—
पहली, औली में स्थापित आर्टिफिशियल स्नो मेकिंग सिस्टम को दुरुस्त कर सुचारु किया जाए।
दूसरी, वर्ष 2019 में उद्घाटन के बाद से बदहाल पड़ी ओपन आइस स्केटिंग रिंक को शीघ्र चालू किया जाए।
उन्होंने बताया कि 15 वर्ष पूर्व दक्षिण एशियाई शीतकालीन खेलों के दौरान यूरोप से करोड़ों रुपये की लागत से आयातित स्नो मेकिंग मशीनें आज कबाड़ साबित हो रही हैं। वहीं, आइस स्केटिंग रिंक का अधूरा कार्य होने के बावजूद उद्घाटन कर दिया गया, जो अब तक उपयोग में नहीं आ सकी है।
आंदोलनकारियों ने इन दोनों परियोजनाओं में हुए खर्च, खरीद-फरोख्त और मेंटेनेंस के नाम पर हुए बजट की जांच की मांग भी उठाई है।
पर्यटन हितधारकों ने स्पष्ट किया कि वे सरकार को पूरा सहयोग देने को तैयार हैं। यदि मशीनें सही हैं तो बर्फ बनाकर दिखाया जाए और यदि तकनीकी खामी है तो उसके कारणों की जांच के लिए एक संयुक्त समिति गठित की जाए, जिसमें स्थानीय जानकार, शासन के प्रतिनिधि और जी एम वी एम के विशेषज्ञ शामिल हों।
धरने को समर्थन देने के लिए आज ब्लॉक प्रमुख ज्योतिर्मठ अनूप नेगी, नगर परिषद ज्योतिर्मठ की चेयरमैन देवेश्वरी शाह और व्यापार मंडल अध्यक्ष नैन सिंह भंडारी भी औली पहुंचे। उन्होंने आंदोलन को जायज ठहराते हुए सरकार से शीघ्र हस्तक्षेप की मांग की। वहीं, बदरीनाथ विधायक लखपत बुटोला ने भी आंदोलन को समर्थन देते हुए मामले को शासन स्तर पर प्रमुखता से उठाने का आश्वासन दिया है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि करोड़ों रुपये की लागत से बने पर्यटन ढांचे की अनदेखी से औली की साख और स्थानीय रोजगार दोनों पर संकट खड़ा हो गया है। अब देखना यह है कि शासन-प्रशासन कब तक इस आंदोलन की सुध लेता है।