- माल्टा को मिले ‘स्टेट फ्रूट’ का दर्जा
- _ धाद के ‘माल्टा का महीना अभियान में विशेषज्ञों ने उठाई मांग।
- दून लाइब्रेरी में सिट्रस आर्थिकी पर हुई गंभीर चर्चा
देहरादून। माल्टा को स्टेट फ्रूट का दर्जा दिए जाने की मांग एक बार फिर तेज हो गई है। ‘माल्टा का महीना’ अभियान के तहत दून लाइब्रेरी में आयोजित विमर्श में विशेषज्ञों ने कहा कि सिट्रस फल पहाड़ की आर्थिकी की दिशा बदल सकते हैं।
हरेला गांव धाद की पहल पर हुए संवाद में आगाज फेडरेशन, मंडी समिति और गढ़वाल विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों ने माल्टा उत्पादन में गिरावट, रोगमुक्त पौध सामग्री के अभाव, कम MSP, सुनिश्चित खरीद और प्रसंस्करण ढांचे की कमी जैसे मुद्दे उठाए। वक्ताओं ने उन्नत नर्सरियों, सहकारी खरीद तंत्र, बेहतर पैकेजिंग और ब्रांडिंग पर जोर दिया।
मंडी समिति सचिव अजय डबराल ने कहा कि माल्टा को कीनू-संतरे से अलग पहचान बनानी होगी, जबकि विशेषज्ञों ने MSP को लागत से ऊपर तय करने और SHG के माध्यम से विपणन की जरूरत बताई। अंत में माल्टा को राज्य फल घोषित करने की मांग दोहराई गई।