उत्तराखंड

ब्रेकिंग : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आस्था के केंद्र में गड़बड़झाला

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हे ईश्वर बदरीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति में यह कैसी अंधेर गर्दी

बद्रीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति में लंबे समय से गड़बड़ झाला।

बदरीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति के भीतर नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाते अधिकारी।

देहरादून/इंफो उत्तराखंड

 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आस्था का केंद्र माने जाने वाला बद्रीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति में लंबे समय से गड़बड़झाला चल रहा है। इस बार मंदिर समिति के कर्मचारी ही इस गड़बड़ी के विरोध में उतर आए हैं।

दरअसल मामला यह है कि श्री बदरीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति के भीतर नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाते हुए वरिष्ठता को ताक पर रखकर मंदिर समिति के अध्यक्ष के भाई की वेतन वृद्धि मामले को लेकर माहौल गरमाया हुआ है। इस मसले पर हंगामा हुआ तो पदाधिकारियों द्वारा आनन-फानन में रोलबैक कर आदेश निरस्त कर दिया गया है।

और बवाल भी क्यों ना हो नियमों को ताक पर रख अस्थाई कर्मचारी के रूप में तैनात मंदिर समिति के अध्यक्ष के सगे भाई का वेतन वृद्धि कर गेस्ट हाउस का प्रभारी यदि बनाया जाएगा। विरोध होना लाजमी है, वहीं इसको लेकर समिति के वरिष्ठता क्रम में कर्मियों में भारी आक्रोश उबल रहा है। नाम न छापने की शर्त पर कुछ कर्मचारियों का दबी जुबान में कथन है, कि मंदिर समिति के भीतर पिछले 10 सालों से मंदिर समिति के कार्यअधिकारी बीडी सिंह व अधिशासी अभियंता अनिल ध्यानी का मनमाना बड़ा खेल चल रहा है।

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अध्यक्ष के भाई का स्थानांतरण भी अधिशासी अभियंता अनिल ध्यानी के हस्ताक्षर से हुआ है आखिर कैसे अधिशासी अभियंता के हस्ताक्षर से यह आदेश हो गए। कर्मचारियों का यह भी कहना है, कि समिति के सीईओ की जड़ें गहरी होने के चलते कोई उनका बाल बांका तक नहीं कर पा रहा है।

विश्वस्त सूत्रों से खबर मिली है कि वर्षों से काम कर रहे स्थाई कर्मियों की पदोन्नति व अस्थाई कर्मियों के स्थायीकरण के मामले को ठंडे बस्ते में डालकर गुपचुप तरीके से बद्रीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति के अध्यक्ष ने वरिष्ठता के क्रम को दरकिनार कर अस्थाई कर्मी के रूप में अपने सगे भाई को मंदिर के विश्राम गृह के प्रबंधन का जिम्मा सौंपने की फाइल का अनुमोदन करने में 1 सेकंड भी नहीं लगाया।

इसके साथ ही मंदिर समिति के अध्यक्ष के भाई समेत दो और लोगों का गुपचुप तरीके से वेतन वृद्धि कर दी गई उसके बाद जब मामला प्रकाश में आया फिर उस आदेश पर रोलबैक कर दिया गया। वहीं इस मामले को लेकर अब कांग्रेस ने भी सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं।

नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने सोशल मीडिया के माध्यम से इस मामले मैं कड़ी प्रतिक्रिया जाहिर की है हालांकि उनके द्वारा पदाधिकारियों का नाम नहीं लिखा गया है लेकिन हमारे पास एक्सक्लूसिव उस आदेश की कॉपी है बद्रीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति के अध्यक्ष के भाई को किस तरह नियमों को ताक पर रखकर वेतन वृद्धि का आदेश दिया गया है प्रतिपक्ष यशपाल आर्य लिखते हैं कि

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श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति में शीर्ष पद पर विराजमान कुछ पदाधिकारीगण और अधिकारियों ने अपने परिजनों को हाल ही में बोर्ड की एक बैठक में निर्णय लेकर वेतन आदि में लाभ पंहुचाया है। बाद में मंदिर समिति के कर्मचारियों द्वारा विरोध करने पर हर तरह से अवैध उस निर्णय को वापस ले लिया गया। इस निर्णय द्वारा जिन संविदा कर्मियों या कार्मिकों को फायदा पंहुचाया जा रहा था वे सभी मंदिर समिति के पदाधिकारियों , सदस्यों या अधिकारियों के परिजन थे।

श्री बदरीनाथ- केदारनाथ मंदिर समिति के बोर्डों में पहले भी अध्यक्षों और सदस्यों ने नौकरियों की रेवड़ियां , प्रमोशन , वेतन बृद्धि आदि अपने परिवार के लोगों, रिश्तेदारों या करीबियों को ही बांटी हैं। कभी उत्तराखण्ड बनने के बाद मंदिर समिति को आजादी के बाद के उच्च स्तर पर पंहुचाने की बात करने वाली पार्टी और उसके मंत्रियों द्वारा मंदिर समिति में नियुक्त अधिकांश पदाधिकारी अब अपने परिजनों को संविदा की नौकरी दिलवाने या वेतन बड़ाने तक ही सीमित हो गए हैं।

क्या कहते हैं एक्सपर्ट

प्राकृतिक न्याय शाश्त्र का सामान्य सिद्धान्त – ‘‘ कन्फिल्कट आफ इंर्टस्ट’’ , भारत के संविधान में वर्णित विभिन्न प्रावधानों के अनुसार – लाभ देने वाला और लेने वाला एक ही नहीं हो सकता है। इसलिए जिन विभागों और कार्यालयों में परिजन नौकरी कर रहे हो वहां परम्परा और नियमों के अनुसार उनको लाभ पंहुचाने वाले पदों पर राजनीतिक या प्रशासनिक नियुक्तियां नहीं होनी चाहिए। लेकिन मंदिर में ऐसे विरले पदाधिकारी या सदस्य होंगे जिनके परिजन वहां नौकरी न कर रहे हों।

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ऐसे में प्रशासनिक और वित्तीय शक्तियों से लैस सर्वशक्तिमान मंदिर समिति से कैसे स्वतंत्र निर्णयों की आशा की जा सकती है। उत्तरांचल कर्मचारी सेवा नियमावली 2002 का नियम 17 भी किसी भी पदाधिकारी या अधिकारी द्वारा परिजनों को लाभ देने संबधी किसी भी निर्णय को लेने पर स्पष्ट रोक लगाता है।

इस मामले में बात करने के लिए हमारे द्वारा जब मंदिर समिति के अध्यक्ष से संपर्क किया गया तो उनका फोन स्विच ऑफ मिला साथ ही मुख्य कार्यकारी अधिकारी बीडी सिंह से संपर्क किया गया तो ऐसा प्रतीत हुआ कि इनके द्वारा हमारा नंबर ही ब्लॉक कर दिया गया है कई बार कॉल करने के बाद भी नंबर व्यस्त आ रहा था।

इस मामले में जब मंदिर समिति में अधिशासी अभियंता अनिल ध्यानी से संपर्क किया गया तो उनका कहना था कि सोमवार को पूरा मामला समझने के बाद ही कुछ कह पाऊंगा फिलहाल इस मामले को लेकर मंदिर समिति के पदाधिकारी घिरते नजर आ रहे हैं अब देखना होगा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आस्था का केंद्र कहा जाने वाला बद्रीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी क्या एक्शन लेते हैं।

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