नीरज पाल, संवाददाता
देहरादून। दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल में उपनल कर्मचारियों की हड़ताल का असर अब मरीजों के साथ-साथ मृतकों के परिजनों पर भी भारी पड़ रहा है। मृत्यु प्रमाण पत्र जैसे जरूरी दस्तावेज के लिए भी लोगों को महीनों चक्कर काटने पड़ रहे हैं।
मंगलवार को रूड़की निवासी आरिफ (25) वर्ष ने बताया कि उनकी धर्मपत्नी का मृत्यु 20 सितंबर 2025 को हो गई थी। इसके बाद से वह मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने के लिए दून अस्पताल के कई चक्कर लगा चुके हैं। उन्होंने कहा कि उनकी माता करीब छह बार अस्पताल आ चुकी हैं, जबकि वह स्वयं भी कहीं बार रूड़की से देहरादून आ रखे हैं, लेकिन कर्मचारी और अधिकारी न होने के वजह से हर बार निराशा हाथ लग जाती है।
उन्होंने बताया कि जब भी अस्पताल आते हैं तो संबंधित कर्मचारी या अधिकारी अपने स्थान पर मौजूद नहीं मिलते। या तो अधिकारी तो छुट्टी पर होते है या फिर उपनल कर्मचारियों की हड़ताल का कारण बताया जाता है। उन्होंने कहा कि एक महीने से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन अब तक उनका मृत्यु प्रमाण पत्र नहीं बन पाया।
बता दें कि उपनल कर्मचारियों की हड़ताल के चलते अस्पताल की सफाई, बिलिंग, पंजीकरण और प्रमाण पत्र जारी करने जैसी व्यवस्थाएं बीते दिनों से पूरी तरह प्रभावित हैं। अब इसके दुष्प्रभाव मृतकों के परिजनों तक पहुंचने लगे हैं, जो अस्पताल के चक्कर काट-काटकर परेशान हो रहे हैं।
दून अस्पताल में चरमराई सफाई व्यवस्था
दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल में उपनल कर्मचारियों की हड़ताल से सबसे ज्यादा प्रभाव सफाई व्यवस्था, बिलिंग और पंजीकरण काउंटरों पर पड़ रहा है। पंजीकरण काउंटरों पर ही पर्चा बनवाने में दो घंटे लग रहे हैं। यहां तक पुरानी बिल्डिंग में सफाई व्यवस्था पूरी तरह बिगड़ गई है। यहां पर वार्डों में पोंछा ना लगने से संक्रमण का खतरा बन गया है। इसके अलावा शौचालयों में गंदगी के अंबार लगे हैं। दुर्गंध से बुरा हाल है। ऐसे में मरीजो के तीमारदारों को खुद ही शौचालय साफ करने पड़ रहे है।

पंजीकरण और बिलिंग काउंटर में अव्यवस्था हावी
दून अस्पताल की ओपीडी में मंगलवार के दिन भी स्वास्थ्य व्यवस्थाएं पूरी तरह से चरमरा गई। यहां पंजीकरण के चार और बिलिंग के तीन ही काउंटर चले। अमित ने कहा कि करीब दो घंटे लाइन में लगे फिर जाकर पर्चा बना। महिला पूजा ने बताया कि बिल कटवाने को करीब एक घंटे इंतजार करना पड़ा। इस दौरान वार्ड बॉय न होने की वजह से मरीजों को खुद तीमारदार जांच के लिए ले जा रहे हैं।

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अस्पताल में ऐसा कोई भी मामला सामने नहीं आया। आपके माध्यम से जानकारी मिली है। उन्होंने कहा कि वैसे तो मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने में कोई भी समय नहीं लग रहा है। उनके पास कुछ न कुछ दस्तावेजों में कमी रह गई होगी जिसकी वजह से थोड़ा सा समय लग रहा होगा। इसके अलावा उन्होंने कहा कि अस्पताल में किसी भी प्रकार की सुविधा रूकी नहीं है। सफाई व्यवस्था ठीक करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि प्रतिदिन दो से ढाई हजार मरीज आ रहे हैं, ऐसे में पंजीकरण, और बिलिंग में थोड़ा समय लग रहा है। लेकिन किसी भी प्रकार व्यवस्था रूकी नहीं है।”
_ डॉ. आरएस बिष्ट, एमएस दून अस्पताल
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