उत्तराखंड

हिमालय की नदियों और जंगल के सवालों के साथ आयोजित हुआ स्मृतिवान संवाद

नदिया तुम धीरे बहो गीत के साथ धाद स्मृतिवन में देश के जलान्दोलन के नाम से पौधा रोपित

देहरादून/इंफो उत्तराखंड

“पानी जहां दौड़ता है, वहां इसे चलना सिखाना है। जहां चलने लगे, वहां इसे रेंगना सिखाना है। जहां रेंगने लगे, वहां इसे ठहराना है। जहां ठहर जाए, वहां इसे धरती के पेट में बैठाना है।” मैग्सेसे अवार्ड से सम्मानित डॉ राजेंद्र सिंह की इन पंक्तियों के साथ जलान्दोलन के पक्ष में धाद स्मृति वन में पौधारोपण किया गया।

राजेंद्र सिंह के अस्वस्थ होने के चलते उनकी अनुपस्थिति में उनके साथियों इन्डियन हिमालयन रिवर बेसिन काउन्सिल की अध्यक्ष डॉ इंदिरा खुराना पर्यावरण कार्यकर्ता सुरेश भाई,सर्वोदय कार्यकर्त्ता रमेश,संजय राणा,अल्मोड़ा की डॉ वसुधा पन्त, हल्द्वानी से एन के भट्ट ने धाद के साथियों के साथ देश में चल रहे जलान्दोलन के पक्ष में पौधा रोपित किया।

इस अवसर पर स्मृति वन में संवाद का आयोजन किया गया. संवाद का शुभारम्भ करते हुए डॉ इंदिरा खुराना ने देश में जल के पक्ष में चल रही विभिन्न गतिविधयों को साझा किया उन्होंने कहा की रिवर बेसिन काउन्सिल 12 पर्वतीय राज्यों और केंद्रशासित प्रदेश लद्दाख के साथ 11 मैदानी राज्यों तक इसके कार्यक्षेत्र है इसके निमित्त हिमालयी क्षेत्र में लम्बी यात्राएँ करते हुए नदियों की आवाज़ को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पटल पर नीति निर्धारण करने वाली संस्थाओं के सामने लाने के लिए काम कर रही है।

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सर्वोदयी कार्यकर्त्ता सुरेश भाई ने स्मृतिवन के प्रयोग को नमामि गंगे का विस्तार कहा जिसमे नदियों के तट पर हरियाली फैलाने के लिए काम किया जा रहा है उन्होने बतया की रक्षा सूत्र अभियान में उन्होंने प्रदेश के 12 लाख वृक्षों को बचा पाए हैं लेकिन आज जब ऑल वैदर रोड के साथ बड़ी संख्या में पेड़ काटे जा रहे है तब इसके वर्तमान मॉडल पर पुनर्विचार की जरूरत है।

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इस जी आर आर के प्रो विनय मोहन बौड़ाई ने बताया कि जल का सवाल आज का है जिसको बनाया नहीं जा सकता बस संरक्षित किया जा सकता है लेकिन हमारी विकास यात्रा ने धरती के पोर्टेबल वाटर लेवल को 3 प्रतिशत से घटाकर 2.5 % ला कर रख दिया है. इसलिए इस दिशा में समाज और सरकार के स्तर पर बड़ी पहल की जरुरत है।

सर्वोदयी कार्यकर्त्ता रमेश जी ने नदिया तुम धीरे बहो गीत के साथ सभा को जलान्दोलन के गीतों को साझा किया धाद स्मृति वन का परिचय देते हुए संस्था के सचिव तन्मय ममगाईं ने बताया कि स्मृतिवन हरेला की 2010 से प्रारम्भ समाजिक यात्रा का एक पड़ाव है।

जिसको 2020 से धाद की पहल पर उत्तराखंड शासन द्वारा उपलब्ध करवाई गयी भूमि पर सामाजिक सहयोग से विकसित किया जा रहा है जो उत्तराखंड के समाज उत्पादन और व्यंजन के निमित्त विभिन्न सामाजिक गतिविधियों के साथ सक्रिय है
संस्था के अध्यक्ष लोकेश नवानी ने कहा की पथरीली भूमि पर विकसित किये जा रहे इस वन की अवधारणा में जहाँ एक तरफ देश के भाषाई सर्वेक्षण करने वाले जॉर्ज ग्रियर्सन के निमित्त पौधा लगाया गया है।

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वहीं प्रख्यात पर्यावरणविद् सुन्दरलाल बहुगुणा के निमित्त पौधा लगाने के साथ प्रदेश के सामाजिक सांस्कृतिक शक्ल देने वाले अन्य विभूतियों के नाम भी पौधे लगाये गये है। सभा को प्रह्लाद अधिकारी संजय राणा डॉ वसुधा पंत ने भी सम्बोधित किया।

इस अवसर पर डॉ जयंत नवानी अश्विनी त्यागी डॉ सरस्वती सिंह संजय भार्गव आशीष गर्ग आनंद कुमार सिंह वीरेंदर खंडूरी सुशील पुरोहित सुरेश अमोली इंदुभूषण सकलानी अनु व्रत नवनि बृजमोहन उनियाल कल्पना बहुगुणा मंजू काला राजीव पांथरी शांति प्रकाश जिज्ञासु विमला रावत विमला कठैत के साथ बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे।

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