अच्छी पहल : “रंवाल्टी” बोली-भाषा में छपा “शादी का कार्ड, “रंवाल्टी भाषा” को मिलेगा बढावा…. पढ़े पूरी खबर

अच्छी पहल : “रंवाल्टी” बोली-भाषा में छपा “शादी का कार्ड, “रंवाल्टी भाषा” को मिलेगा बढावा…. पढ़े पूरी खबर

उत्तरकाशी (नौगांव)/इन्फो उत्तराखंड

वर्तमान समय में जहां अक्सर पहाड़ी लोग अपनी संस्कृति सभ्यताओं को भूलते जा रहे हैं और लोगों को अपनी बोली भाषा बोलने में भी शर्म महसूस होती है वहीं कुछ पहाड़ी युवा एवं युवतियां ऐसे भी हैं जो अपने प्रयासों से पहाड़ी सभ्यता संस्कृति के साथ ही बोली-भाषा को भी सहेजने का काम कर रहे हैं।

ऐसे ही हम बात करे नौगांव विकास खंड के सुनारा गांव निवासी रंगकर्मी तिलक चंद रमोला ने दो साल पहले अपनी बेटी का शादी कार्ड रंवाल्टी भाषा में विशेष पहचान बनी थी, उसके बाद पलेठा गांव निवासी मोहन सिलवाल, कांशी गांव के वसुदेव सिंह राणा समेत दर्जनों लोग अपनी बोली भाषा को विशेष पहचान बनाने के लिए यह प्रयास जारी है।

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आज हम आपको उत्तरकाशी जिले के नौगांव विकासखंड के सुनारा गांव की एक युवती से रूबरू कराने जा रहे हैं जिनकी शादी का निमंत्रण कार्ड इन दिनों सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। जी हां.. हम बात कर रहे हैं।

सुनारा गांव की अनीषा के शादी कार्ड निमंत्रण कार्ड की। जिन्होंने अपनी शादी का निमंत्रण कार्ड शुद्ध रंवाल्टी भाषा में छपवाकर न सिर्फ रंवाल्टी बोली-भाषा को सहेजने की दिशा में सराहनीय कदम बढ़ाया है, जिसे लोगों द्वारा खासा पसंद भी कर रहे है बल्कि गढ़वाली बोली-भाषा को सहेजने का उनका यह सराहनीय प्रयास उन लोगों को भी आईना दिखाता है जो अपनी बोली भाषा बोलने में शर्म महसूस होती है।

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बता दें कि नौगांव ब्लाक की सुनारा गांव की अनीषा की शादी ब्यौ 16/17 फरवरी को है। इन दिनों उनका शादी का निमंत्रण कार्ड सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है जिसका एकमात्र कारण यह है कि अनिषा ने अपनी शादी के कार्ड को शुद्ध रंवाल्टी बोली में छपवाया गया है। उनके इस सराहनीय कार्य को सोशल मीडिया पर लोगों द्वारा खासा सराहा जा रहा है।

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अनीषा ने बताया कि उन्होंने एम ए, बीएड तक की पढ़ाई के साथ शिक्षिका के रूप में कार्य किया है। उनकी अपनी संस्कृति के प्रति बेहद रूचि है। इससे दो साल पहले उनके सुनारा गांव के तिलक चंद रमोला ने अपनी बेटी का शादी कार्ड की शुरूआत रंवाल्टी भाषा में लिखकर की।

यही कारण है कि उन्होंने भी अपने शादी के निमंत्रण कार्ड को शुद्ध रंवाल्टी भाषा में छपवाया है। अनीषा रावत की गढ़वाली गायक और रंवाल्टी गीत नृत्यों में भी विशेष रूचि रखती है ।

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