- बच्चों में बढ़ रहा विंटर डायरिया का खतरा
- जानिए लक्षण और बचाव के उपाय
नीरज पाल, संवाददाता
देहरादून। गर्मियों में तो बच्चे अक्सर दूषित खानपान के कारण डायरिया की चपेट में आते हैं, लेकिन सर्दियों में यह बीमारी उतनी ही तेजी से बच्चों को प्रभावित कर रही है। ठंड के मौसम में होने वाला विंटर डायरिया अधिक खतरनाक साबित होता है, डिहाइड्रेशन की स्थिति में बच्चों को नारियल पानी या ओआरएस जैसे ठंडे तरल पदार्थ देना मुश्किल हो जाता है।
दून अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अशोक कुमार ने बताया कि अस्पताल की ओपीडी में रोजाना पांच से सात बच्चे विंटर डायरिया के लक्षणों के साथ पहुंच रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह एक संक्रामक रोग है, जो मुख्य रूप से वायरस के संपर्क में आने से फैलता है। उन्होंने कहा कि बार-बार ढीला मल (लूज मोशन), उल्टी, पेट दर्द या ऐंठन इसके प्रमुख संकेत हैं। ऐसे लक्षण दिखाई दें तो अभिभावकों को देरी किए बिना बच्चे को डॉक्टर के पास ले जाना चाहिए।

डॉ. अशोक ने कहा कि रोटावायरस जैसे वायरस दूषित पानी और भोजन के माध्यम से बच्चों में संक्रमण फैलाते हैं। उन्होंने कहा कि इसके बचाव के लिए घर और आसपास की साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देना जरूरी है। बच्चों को ताजा और सुरक्षित भोजन-पानी ही दें, ताकि बीमारी से बचाव हो सके।
लक्षण :-
- लूज मोशन (दस्त)
- उल्टी या मतली
- पेट दर्द, मरोड़ या ऐंठन
- भूख कम लगना
- शरीर में पानी की कमी (डिहाइड्रेशन)
- कमजोरी, सुस्ती
- गंभीर स्थिति में आँखों का धँसना
- पेशाब कम आना
- होंठ सूखना
बचाव :-
- घर और आसपास साफ–सफाई बनाए रखें।
- बच्चों को बार–बार हाथ धोना सिखाएं।
- ताजा और गर्म भोजन ही दें।
- छिले फल–सब्ज़ियाँ और उबला/फ़िल्टर किया पानी पिलाएं।
- दूध व डेयरी उत्पाद हमेशा उबालकर ही दें।
- कटे–खुले खाद्य पदार्थ और ठंडा बासी खाना न खिलाएं।
- बच्चों को ठंड से बचाएँ, ठंडा पानी/आइसक्रीम/जंक फूड से बचाव।
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