
- उत्तराखंड RLD अध्यक्ष को लेकर विवाद गहराया, गिरफ्तारी वारंट और कुर्की आदेश के दस्तावेज वायरल; जयंत चौधरी की चुप्पी पर निगाहें
- व्हाट्सएप ग्रुपों में प्रसारित दस्तावेजों से पार्टी में खलबली, पुराने विवाद और शिकायतें भी फिर सुर्खियों में; राष्ट्रीय संगठन महामंत्री त्रिलोक त्यागी से भी मांगा जा रहा जवाब।
कुलदीप कुमार
उत्तराखंड/हरिद्वार। राष्ट्रीय लोकदल (RLD) की उत्तराखंड इकाई एक बार फिर विवादों के केंद्र में आ गई है। प्रदेश अध्यक्ष राजेंद्र पंत को लेकर सामने आए न्यायिक दस्तावेजों ने पार्टी के अंदर नई राजनीतिक हलचल पैदा कर दी है। गिरफ्तारी वारंट और कुर्की आदेश से संबंधित दो दस्तावेज इन दिनों पार्टी के विभिन्न व्हाट्सएप ग्रुपों में तेजी से प्रसारित हो रहे हैं। दस्तावेजों में दर्ज राजेंद्र कुमार नाम को प्रदेश अध्यक्ष राजेंद्र पंत से जोड़कर देखा जा रहा है। इस घटनाक्रम के बाद संगठन के भीतर चर्चाओं और सवालों का सिलसिला तेज हो गया है।
प्रसारित दस्तावेजों में एक गिरफ्तारी वारंट है, जो दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 70 के अंतर्गत जारी प्रारूप में दिखाई देता है। वहीं दूसरा दस्तावेज धारा 83 के तहत कुर्की की कार्रवाई से संबंधित है। दोनों दस्तावेजों में 138 NI Act का उल्लेख है, जो चेक अनादरण से जुड़ा प्रावधान है। दस्तावेजों पर 30 अक्टूबर 2026 की तारीख भी अंकित दिखाई देती है। हालांकि, दस्तावेजों में दर्ज व्यक्ति और RLD प्रदेश अध्यक्ष राजेंद्र पंत की पहचान के एक होने की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
इन दस्तावेजों के सार्वजनिक और संगठनात्मक समूहों में प्रसारित होने के बाद पार्टी की प्रदेश इकाई की कार्यशैली पर भी सवाल उठने लगे हैं। चर्चा केवल न्यायिक दस्तावेजों तक सीमित नहीं है, बल्कि राजेंद्र पंत से जुड़े पुराने विवाद भी दोबारा चर्चा में आ गए हैं।
पार्टी से जुड़े सूत्रों के अनुसार, पूर्व में श्रीनगर के एक पूर्व सैनिक के साथ कथित ठगी का मामला भी संगठन के भीतर उठा था। आरोप है कि इस प्रकरण में पार्टी के एक वरिष्ठ नेता के नाम और राजनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल किया गया। हालांकि, इस मामले में शिकायत और उपलब्ध साक्ष्यों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।
इसके अतिरिक्त, महिलाओं के साथ कथित दुर्व्यवहार और अनुचित व्यवहार को लेकर भी प्रदेश संगठन के कुछ पदाधिकारियों द्वारा राष्ट्रीय नेतृत्व तक शिकायत पहुंचाए जाने की बात सामने आती रही है। इन शिकायतों के संदर्भ में राष्ट्रीय संगठन महामंत्री त्रिलोक त्यागी की भूमिका भी चर्चा में है।
पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का दावा है कि पूर्व में कई शिकायतें राष्ट्रीय स्तर पर पहुंचाई गई थीं, लेकिन उन पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। एक महिला से जुड़े कथित प्रलोभन और अनुचित संपर्क के मामले में भी संगठन तक शिकायत पहुंचने की बात कही जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, उस समय प्रदेश कार्यकारिणी भंग कर दी गई थी। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित पक्षों का जवाब सामने आना अभी बाकी है।
अब इस पूरे प्रकरण ने राष्ट्रीय नेतृत्व के सामने भी असहज स्थिति पैदा कर दी है। राष्ट्रीय लोकदल के अध्यक्ष जयंत चौधरी के लिए यह मामला केवल प्रदेश संगठन का आंतरिक विवाद नहीं, बल्कि पार्टी की राजनीतिक और नैतिक साख से भी जुड़ा हुआ है।
स्वर्गीय चौधरी चरण सिंह की विचारधारा, सामाजिक सम्मान और नैतिक राजनीति की विरासत का दावा करने वाले संगठन में यदि पदाधिकारियों को लेकर लगातार गंभीर शिकायतें सामने आती हैं, तो उनकी निष्पक्ष जांच और जवाबदेही भी उतनी ही जरूरी हो जाती है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या जयंत चौधरी इस पूरे प्रकरण का संज्ञान लेकर निष्पक्ष जांच कराएंगे? क्या त्रिलोक त्यागी पूर्व में मिली शिकायतों पर संगठन का पक्ष स्पष्ट करेंगे? और क्या राजेंद्र पंत सामने आकर प्रसारित हो रहे दस्तावेजों तथा उनसे जुड़े आरोपों पर अपना जवाब देंगे?
उत्तराखंड की राजनीतिक जमीन पर RLD की साख अब राष्ट्रीय नेतृत्व के फैसले से भी जुड़ती दिखाई दे रही है। राजनीति में विरासत का सम्मान केवल विचारधारा के प्रचार से नहीं, बल्कि अपने संगठन में जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करने से होता है।
