
- हरक सिंह रावत की कथित पत्नी पर मकान हड़पने का आरोप, वृद्ध दिव्यांग ने एसएसपी से लगाई न्याय की गुहार
- दोनों हाथ गंवा चुके पीड़ित का दावा- 52 लाख रुपये का भुगतान नहीं हुआ, बाउंस हुआ 31 लाख का चेक
- मकान पर कब्जे, धमकी और सील तोड़ने के भी लगाए आरोप; एसएसपी से जांच और कार्रवाई की मांग
देहरादून। राजधानी में संपत्ति विवाद का एक गंभीर मामला सामने आया है। दोनों हाथों से दिव्यांग और बुजुर्ग हरिओम सहगल ने पूर्व कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत से जुड़ी जसबीर कौर आनंद उर्फ सोनिया आनंद रावत पर धोखाधड़ी कर उनका मकान हड़पने, भुगतान नहीं करने और कब्जा करने के गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़ित ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक देहरादून को शिकायती प्रार्थना पत्र देकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और न्याय दिलाने की मांग की है।
शिकायतकर्ता हरिओम सहगल के मुताबिक, आर्थिक मजबूरी के चलते उन्होंने 21 जून 2021 को खुड़बुड़ा मोहल्ला स्थित अपना भवन जसबीर कौर आनंद को दो विक्रय पत्रों के माध्यम से बेचा था। उनका आरोप है कि रजिस्ट्री के दौरान भुगतान के लिए दिए गए एसबीआई के दो चेक, जिनकी कुल धनराशि 35.20 लाख रुपये थी, उनसे वापस ले लिए गए। इसके अलावा 14 जून 2021 को एसबीआई का 2.80 लाख और पंजाब नेशनल बैंक का 10 लाख रुपये का चेक दिया गया। पीड़ित का दावा है कि उन्हें कोई नकद भुगतान भी नहीं किया गया।
हरिओम सहगल के अनुसार, बाद में उन्हें 31 लाख रुपये का एक अन्य चेक दिया गया, जिसे अगस्त में बैंक में लगाने के लिए कहा गया। 20 अगस्त 2021 को चेक बैंक में प्रस्तुत करने पर खाते में पर्याप्त धनराशि नहीं होने के कारण वह बाउंस हो गया। इसके बाद उन्होंने अपने अधिवक्ताओं के माध्यम से नोटिस भेजा, लेकिन नोटिस वापस लौट आया। पीड़ित ने बताया कि इसके बाद उन्हें महाराष्ट्र के नासिक में चेक बाउंस का मुकदमा दर्ज कराना पड़ा। उनका दावा है कि इस मामले को लेकर लंबी कानूनी लड़ाई लड़ने के बाद सुप्रीम कोर्ट के माध्यम से प्रकरण देहरादून स्थानांतरित कराया गया।

रजिस्ट्री निरस्तीकरण के मुकदमे भी अदालत में
शिकायतकर्ता का कहना है कि संबंधित संपत्ति की रजिस्ट्री निरस्त कराने के लिए भी न्यायालय में दो वाद लंबित हैं। उनका आरोप है कि विपक्षी पक्ष की ओर से लगातार अनुपस्थिति के कारण कई बार एकपक्षीय आदेश की स्थिति बनी। उन्होंने मेडिकल प्रमाणपत्र को लेकर भी सवाल उठाए हैं। पीड़ित का दावा है कि अदालत में साक्ष्यों के आधार पर संबंधित मेडिकल प्रमाणपत्र को गलत साबित किया गया और उसे निरस्त कर दिया गया।
कब्जा कर घर से निकालने और धमकी देने का आरोप
हरिओम सहगल ने शिकायत में आरोप लगाया है कि 30 जनवरी 2022 को उन्हें कथित तौर पर दबंग लोगों के माध्यम से उनके ही भवन से जबरन बाहर निकाल दिया गया। उन्हें पैर तुड़वाने और जान से मारने की धमकी भी दी गई। उनका कहना है कि उन्होंने स्थानीय पुलिस से शिकायत की, लेकिन मामला सिविल न्यायालय से संबंधित बताते हुए तत्काल कार्रवाई नहीं की गई। पीड़ित का दावा है कि संपत्ति के विक्रय का पूरा प्रतिफल उन्हें नहीं मिला और इस संबंध में कानूनी विवाद अभी भी न्यायालय में विचाराधीन है।
एमडीडीए की सील तोड़ने पर भी उठाए सवाल
शिकायत में पीड़ित ने भवन को लेकर मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) की कार्रवाई पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि भवन को वर्ष 2018 में एमडीडीए ने सील किया था, लेकिन बाद में कथित तौर पर सील तोड़कर भवन पर दोबारा कब्जा कर लिया गया। उन्होंने सवाल किया है कि सील किसके आदेश पर खोली गई और क्या इसके लिए प्राधिकरण से अनुमति ली गई थी।
बैंक खातों और पहचान की जांच की मांग
शिकायतकर्ता ने जसबीर कौर आनंद, जसबीर कौर रावत और सोनिया आनंद रावत नामों से अलग-अलग बैंकों में खाते संचालित होने का दावा करते हुए संबंधित बैंक खातों और केवाईसी दस्तावेजों की जांच कराने की मांग की है। उन्होंने पूर्व मंत्री हरक सिंह रावत के साथ वैवाहिक संबंधों और उससे जुड़े दस्तावेजों की भी जांच की मांग उठाई है। इसके अलावा संपत्ति से जुड़े अन्य मामलों और गुरुद्वारे की जमीन पर कथित कब्जे को लेकर भी जांच की मांग की गई है।
एसएसपी से न्याय की गुहार
बुजुर्ग दिव्यांग हरिओम सहगल ने एसएसपी से मांग की है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि संपत्ति का विवाद न्यायालय में लंबित रहने तक उनके भवन की कानूनी स्थिति स्पष्ट की जाए और जरूरत पड़ने पर एमडीडीए के माध्यम से भवन को दोबारा सील कराया जाए। पीड़ित ने अपनी स्थिति का हवाला देते हुए कहा कि दोनों हाथ नहीं होने के बावजूद उन्हें अपनी संपत्ति और सम्मान की रक्षा के लिए वर्षों से अदालतों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।
