बड़ी खबर : बाघ के हमले में युवक की मौत पर ग्रामीणों ने जताया रोष, हरीश रावत ने किया नेशनल हाईवे 309 जाम

बड़ी खबर : बाघ के हमले में युवक की मौत पर ग्रामीणों ने जताया रोष, हरीश रावत ने किया नेशनल हाईवे 309 जाम

रामनगर/ इंफो उत्तराखंड 

रामनगर के मोहान क्षेत्र में बीती शाम को दो युवक अपनी बाइक से जा रहे थे, तभी बीच रास्ते में उनकी बाइक पर बाघ ने हमला कर दिया। इसी हमले में बाइक में बैठे पीछे युवक को बाघ ने घसीटकर जंगल के अंदर ले गया।

वहीं वन विभाग के खिलाफ धरना प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों के साथ ही पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने भी नेशनल हाईवे 309 जाम कर दिया है। उन्होंने कहा कि जब तक वन विभाग एसडीएम यहां नहीं पहुंचेंगे, तब तक हम धरने पर बैठे रहेंगे।

वहीं मौके पर पहुंची वन विभाग ने जंगल में सर्च ऑपरेशन चलाया, जहां वन विभाग को काफी खोजबीन के बाद युवक का एक हाथ बरामद हुआ। वहीं वन विभाग लगातार तीन टीमों में बंटकर युवक व बाघ की तलाश कर रही है।

बता दें कि अफजल और अनस अल्मोड़ा से रानीखेत घूमने गए थे, वहां से वापसी में जब वह मोहान के पास पहुंचे तो अनंत मोटरसाइकिल चला रहा था, और अफजल पीछे बैठा हुआ था। तभी इन पर बाघ ने हमला कर दिया। जिसमें वह अफजल को घसीट कर जंगल में ले गया।

वहीं सूचना के बाद अफजल के परिवार के लोग अमरोहा जिला मुरादाबाद से रामनगर मोहान पहुंचे, और मोहन में आबादी क्षेत्र के पास हुई इस घटना के बाद ग्रामीणों में काफी ज्यादा रोष देखने को मिल रहा है।

वहीं ग्रामीणों का कहना है कि इस रास्ते पर इंटर कॉलेज भी है, जहां लगातार छात्र-छात्राएं आते जाते रहते हैं। वहीं बाघ पशुओं को भी निवाला बना रहा है। उन्होंने कहा कि तुरंत ही इस बाघ को अगर नहीं पकड़ा गया तो वह उग्र आंदोलन करेंगे।

पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत 

यूं तो जीवन और उसमें भी सार्वजनिक जीवन पूर्णतः परिस्थितियों के अधीन होता है। चला था देहरादून की बैठक के लिए हर हालत में 3 बजे देहरादून पहुंचने का संकल्प लेकर, लेकिन 02:30 से 03:00 बजे, रामनगर से पहले #मोहान से चल पाया।

कल रात #बाघ ने एक नौजवान को मोटर बाइक जो जा रहा था उसको पकड़ कर के खा लिया और उसकी बॉडी भी अभी तक ट्रेस नहीं हो पाई है। एक हाथ केवल मिला है। गांव वाले बहुत क्रोधित हैं, क्योंकि यह दूसरी बार ऐसी वारदात है और वो चार बाघ हैं।

एक मेल-फीमेल और दो उनके बच्चे या एक माँ और तीन बच्चे जो भी हालत है और उनमें से माँ को तो टेंपराइज करके पहले पकड़ लिया गया है। लेकिन तीन अब भी हैं, जो खतरनाक हैं और जिनसे लोगों के जीवन को खतरा है। गांव के लोग अपने बहुत असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।

जब मैं पहुंचा तो लंबी कतार लगी हुई थी। धरना देने के लिए सड़क पर लोग बैठे हुए थे। मैंने बमुश्किल ग्रामीणों का विश्वास जीता, जब उनके साथ स्वयं धरने पर बैठ गया। फिर इस आश्वासन के साथ जब तक अधिकारी नहीं पहुंच जाते हैं, डीएफओ नहीं आ जाते हैं, डायरेक्टर कॉर्बेट नहीं आ जाते हैं, एसडीएम और दूसरे वरिष्ठ अधिकारी नहीं आ जाते हैं, उठने को लोग तैयार नहीं थे।

दो बार माननीय मुख्यमंत्री जी से बातचीत की। कृपा है, वो दोनों बार स्वयं लाइन पर आए। कमिश्नर से बातचीत की, डीएम से 3 बार बातचीत की, डीएफओ साहब से बातचीत की, डायरेक्टर से बात की, लेकिन लोग संतुष्ट नहीं हुए जब तक अधिकारी वहां पहुंच नहीं गए और उस पर भी जब मैंने उनसे कहा कि यदि आपकी, इनकी वार्ता सफल नहीं हो पाए जो चार वरिष्ठ अधिकारी पहुंच गए हैं, डीएफओ, डिप्टी डायरेक्टर कॉर्बेट, एडीएम और एडिशनल एसपी, यदि आपकी वार्ता सफल नहीं होती है तो कल आप धरने पर बैठो और मैं भी आपका साथ देने आऊंगा, तब लोगों ने इस आश्वासन पर लोगों को जाने दिया, जाम खुलवाया।

जो जाम में फंसे हुए लोग थे, वह लोग कह रहे थे कि हरीश रावत धरने पर बैठे हुए हैं इसलिए जाम लगा है और जाम वाले कह रहे थे कि हरीश रावत हमको बहला रहे हैं और जाम खुलवाना चाह रहे हैं, तो बड़ी अजीब विडंबना के बीच में रास्ता निकाल पाया।

देखिए, उनकी वार्ता सफल हो और मैंने, कमिश्नर व डीएम आदि सबको सुझाव दिया है कि इस समस्या के समाधान के लिए कुछ बातें जो मेरी समझ में है जिनको अमल में लाना चाहिए, वो उनको मैंने बतायी हैं। मुझे उम्मीद है कि कुछ सार्थक कदम उठेंगे।

उत्तराखंड