उत्तराखंड

भाजपा का अंतर्कलह अब सड़क पर : गरिमा दसोनी

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  • भाजपा का अंतर्कलह अब सड़क पर, अपनी ही सरकार में काम कराने में नाकाम चौहान दंपत्ति की बौखलाहट सामने आई : गरिमा मेहरा दसोनी

देहरादून। उत्तराखंड कांग्रेस की मुख्य प्रवक्ता गरिमा मेहरा दसोनी ने चकराता क्षेत्र की योजनाओं को लेकर भाजपा के भीतर चल रहे विवाद पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि भाजपा का अंतर्कलह अब पूरी तरह जनता के सामने आ चुका है। अपनी ही पार्टी की सरकार के समाज कल्याण मंत्री खजानदास के आवास पर भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं का प्रदर्शन इस बात का प्रमाण है कि सरकार और संगठन के बीच समन्वय की स्थिति क्या है।

गरिमा मेहरा दसोनी ने कहा कि मधु चौहान और मुन्ना सिंह चौहान अपनी ही सरकार में काम कराने में असफल साबित हो रहे हैं और अब अपनी राजनीतिक नाकामियों का ठीकरा दूसरों पर फोड़ रहे हैं।

गरिमा ने कहा कि चकराता-जौनसार क्षेत्र में भाजपा की राजनीतिक स्थिति और चौहान दंपत्ति की राजनीतिक पकड़ को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। चकराता में मधु चौहान को 2007 और 2017 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस के प्रीतम सिंह से पराजय मिली थी। 2022 में भी भाजपा ने चकराता में मुंह की खाई।

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गरिमा मेहरा दसोनी ने कहा कि 2025 के पंचायत चुनाव में भी स्थिति चौहान दंपत्ति के पक्ष में नहीं रही। मधु चौहान ने जिला पंचायत सदस्य का चुनाव जरूर जीता, लेकिन जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में कांग्रेस समर्थित सुखविंदर कौर के हाथों भाजपा प्रत्याशी के रूप में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। जौनसार-बावर की 11 जिला पंचायत सीटों में कांग्रेस ने सात सीटें जीतीं, जबकि भाजपा तीन पर रही।

उन्होंने कहा कि इन राजनीतिक झटकों के बाद अपनी खीज और बौखलाहट मंत्री के खिलाफ प्रदर्शन के रूप में निकालने के बजाय चौहान दंपत्ति को अपनी राजनीतिक और संगठनात्मक भूमिका का आत्ममंथन करना चाहिए। चकराता-जौनसार की जनता विकास और अपने क्षेत्र के अधिकारों की बात चाहती है, भाजपा के नेताओं की आपसी लड़ाई नहीं।

गरिमा ने कहा कि महेंद्र भट्ट बताएं भाजपा का अनुशासन कहां है?
कांग्रेस की मुख्य प्रवक्ता ने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट को भी घेरते हुए कहा कि भाजपा नेतृत्व लगातार अनुशासन और संगठन की मजबूती की बात करता है, लेकिन जब अपनी ही पार्टी के नेता अपनी ही सरकार के मंत्री के घर पर प्रदर्शन कर रहे हैं तो पार्टी का अनुशासन कहां चला जाता है?

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उन्होंने कहा कि महेंद्र भट्ट, कांग्रेस को अनुशासन का पाठ पढ़ाने से पहले अपनी पार्टी का अनुशासन देखिए। आपकी ही पार्टी के नेता अपनी ही सरकार के मंत्री के आवास पर धरना दे रहे हैं। अगर शिकायतों के समाधान के लिए पार्टी का संगठनात्मक मंच मौजूद है तो फिर यह मामला सड़क तक कैसे पहुंच गया?
पार्टी के भीतर इस तरह का सार्वजनिक टकराव सामने आने पर भाजपा नेतृत्व क्या कार्रवाई करता है?

मंत्री खजानदास को आत्महत्या तक की बात क्यों कहनी पड़ी?
गरिमा मेहरा दसोनी ने कहा कि इस पूरे घटनाक्रम का सबसे गंभीर पहलू यह है कि अपनी ही पार्टी के नेताओं द्वारा लगाए गए आरोपों के जवाब में मंत्री खजानदास को सार्वजनिक रूप से यह कहना पड़ा कि यदि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप साबित होते हैं तो वह मंत्री पद से इस्तीफा दे देंगे और आत्महत्या कर लेंगे।

गरिमा ने पूछा यह कैसा अनुशासन है और यह किस तरह की प्रेशर पॉलिटिक्स है, जिसमें भाजपा के एक मंत्री को अपनी ही पार्टी के लोगों के आरोपों का जवाब देते हुए आत्महत्या तक की बात कहनी पड़ रही है? क्या यही भाजपा का संगठनात्मक अनुशासन है?”
भाजपा संगठन को तथ्यों के साथ स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए,
अब केवल लीपापोती से काम नहीं चलेगा

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गरिमा मेहरा दसोनी ने कहा कि भाजपा नेतृत्व द्वारा संबंधित नेताओं को तलब कर लेना या बंद कमरे में बैठक कर लेना इस विवाद का स्थायी समाधान नहीं है। जो राजनीतिक नुकसान और भाजपा की अंदरूनी कलह जनता के सामने आनी थी, वह सामने आ चुकी है। अब केवल डैमेज कंट्रोल और लीपापोती से काम नहीं चलेगा।

उन्होंने कहा कि चौहान दंपत्ति को जनता के बीच अपनी राजनीतिक स्थिति और संगठनात्मक भूमिका पर आत्ममंथन करना चाहिए। वहीं भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट को यह जवाब देना चाहिए कि उनकी पार्टी में अनुशासन और आंतरिक शिकायत निवारण की व्यवस्था वास्तव में कितनी प्रभावी है।

भाजपा आज विपक्ष को अनुशासन का पाठ पढ़ा रही है, लेकिन उसकी अपनी सरकार में मंत्री के घर के बाहर उसके ही कार्यकर्ताओं का धरना और मंत्री का आत्महत्या तक की बात कहना भाजपा के संगठनात्मक दावों पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

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