- सपनों को मिलेगी नई उड़ान: ‘उदयन केयर’ की 19वीं इंडक्शन सेरेमनी में देहरादून की 30 छात्राओं को मिली फेलोशिप
देहरादून। भारत में बेटियों की शिक्षा और जीवन को बेहतर बनाने की दिशा में कार्य करने वाली संस्था उदयन केयर फाउंडेशन से संबद्ध कार्यक्रम “उदयन शालिनी फेलोशिप प्रोग्राम” का रविवार को 19वाँ दीक्षा समारोह (Induction programme ) आयोजित किया गया. इसमें कक्षा 10 में अच्छा प्रदर्शन करने वाली उन 30 मेधावी छात्राओं को

72 छात्राओं के साथ 2002 में शुरू हुआ था सफर
उदयन केयर फाउंडेशन की फाउंडर डॉ किरण मोदी ने कहा कि साल 1996 में उदयन केयर की नींव रखी गई थी. उन्होंने उदयन घर की शुरुआत की थी जिनमें अनाथ बच्चों को रखा जाता था. उस समय उन्होंने खुद मेंटर मॉम के साथ इसकी शुरुआत की थी और आज हमारा कुनबा बहुत बड़ा हो गया हैं जिसमें देशभर में हमारी 8 हजार से ज्यादा बेटियां शालिनी के रूप में जुड़कर काम कर रही हैं।
उन्होंने कहा कि उदयन केयर फाउंडेशन के देहरादून चैप्टर को 18 साल हो गए हैं और इस साल 19वें इंडक्शन सेरेमनी के अवसर पर 30 बेटियां और जुड़ गई हैं. उन्होंने बताया कि इस साल देशभर में 1200 छात्राएं जुड़ गई हैं. उन्होंने कहा कि उदयन शालिनी फेलोशिप प्रोग्राम सिर्फ आपको शिक्षा के क्षेत्र में मार्गदर्शन नहीं करता है बल्कि आपको शालिन महिला बनने के लिए प्रेरित करता है।
उन्होंने कहा कि उदयन का मतलब है एक ऐसा सवेरा जिसकी रोशनी कभी मंद नहीं पड़ती है, इसलिए हम भी चाहते हैं कि हमारी शालिनी भी ऐसे ही हमेशा चमकती रहे. उन्होंने कहा कि उदयन केयर का “उदयन शालिनी फेलोशिप प्रोग्राम” साल 2002 में 72 छात्राओं के साथ शुरू किया गया था लेकिन आज यह 15 राज्यों और देश के 38 शहरों में बालिका शिक्षा के क्षेत्र में काम कर रहा है. उन्होंने कहा कि यह सपना आपका है, हम हाथ बढ़ाकर रास्ता दिखायेंगे।

उन्होंने कहा कि उदयन केयर में कई उदाहरण है. दर्शना एक किसान परिवार की बेटी थी. कैंब्रिज में नौकरी मिल रही थी. उन्होंने देश में विज्ञानशाला से जुड़कर काम कर रही हैं. उन्होंने कहा शालिनी का अर्थ है वह महिला जो डिग्निफाइड और इंपॉवर वीमेन हो. उन्होंने कहा शालिनी सिर्फ खुद को ही आगे नहीं बढ़ाती है बल्कि वह दूसरों को लेकर चलती हैं, वह अच्छी इंसान बनकर समाज के लिए भी कुछ करना चाहती हैं।
इस दौरान उदयन शालिनी फेलोशिप प्रोग्राम देहरादून चैप्टर की कोर कमेटी मेंबर दलजीत कौर ने कहा कि उदयन केयर शालिनी फैलोशिप प्रोग्राम की बेटियां देश ही नहीं विदेश में भी अपनी मेहनत के बलबूते परचम लहरा रही हैं. उन्होंने नई चयनित हुई शालिनी को प्रोत्साहित करते हुए उन्हें उज्जवल भविष्य की कामना की. उन्होंने आगे यह भी कहा कि प्रदेश में बेटी शिक्षा का अनुपात चिंतनीय विषय है.
उन्होंने कहा कि समाज में बेटियों का जन्म एक उत्सव के रूप में मनाया जाता है. उन्होंने कहा शालिनी भावी माताएं भी हैं तो आपको इसके लिए भविष्य में काम करना है. कार्यक्रम के दौरान उदयन केयर फाउंडेशन ने अपने की पार्टनर्स में शामिल आसरा ट्रस्ट नीरू खन्ना, संयोगिता, फैज़ल, अदनान, रुचिता नैथानी, सौरभ तिवारी, विजय, ज्योति और वेल्हम गर्ल्स स्कूल की प्रिंसिपल सुरभिजैसे कई लोगों ने बेटियों की शिक्षा के लिए उनके बढ़ने के लिए मेंटर के रूप में इंटरशिप प्रोग्राम समेत कई तरह के प्रोग्राम में सहायता करते हैं. उदयन केयर फाउंडेशन ने उन्हें मोमेंटो देकर सम्मानित किया.
वेल्हम गर्ल्स स्कूल की वाइस प्रिंसिपल सुबोहि राशिद ने नई शालिनी के हौसले की सराहना करते हुए कहा कि आप अपने सपने यहां रहकर पूरे कर सकते हैं लेकिन आपको पूरी लगन के साथ काम करना होगा. उन्होंने कहा कि उदयन शालिनी फेलोशिप प्रोग्राम में आपको अपने पैरों पर खड़े होकर दूसरों को भी आगे बढ़ाने का काम करना है. उन्होंने कहा कि हम लोग मिलकर इस प्रोग्राम को चला रहे हैं जिसका हिस्सा आप बन चुके हैं. हमें उम्मीद है आप मेहनत लगन से अपने सपनों की उड़ान भरेंगे और आगे जाएंगे.
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि एवं आईएफएस अधिकारी नीलिमा शाह ने कहा कि 2008 में 27 शालिनी थी. उन्होंने कहा कि कम समय में इतने बच्चे एसोसिएट हो रहे हैं इसका मतलब है कि आप आगे बढ़ रहे हैं. उन्होंने फेलोशिप प्रोग्राम के अंतर्गत यहां आए हैं, आपको स्कूलों में खोजकर निकाला गया है क्योंकि आपके भीतर वह काबिलियत है. उन्होंने कहा कि मैं टिहरी गढ़वाल से हूं. उन्होंने बताया कि “मैं भी लगभग 18 साल पहले उदयन केयर फाउंडेशन के शालिनी प्रोग्राम से जुड़ी थी”, मैंने भी लगातार मेहनत की और मुझे भी यहां मेंटर का मार्गदर्शन मिला।
उन्होंने छात्राओं को प्रेरित करते हुए कहा कि जिसके पास सपने हैं वहीं धनवान है लेकिन उसके लिए आपको जी जान से लगातार काम करना पड़ेगा तभी आप अपनी मंजिल पा सकते हैं. उन्होंने कल्पना चावला, मैरी कॉम जैसे उदाहरण देते हुए कहा कि संघर्षों के बावजूद ये महिलाएं के सफल हो सकतीं हैं तो आप भी दृढ़ निश्चय होकर अपनी राह खुद बना सकते हैं. उन्होंने छात्राओं को प्रेरित करने के साथ ही उनके अभिभावकों को उनकी बेटियों के उदयन केयर शालिनी फेलोशिप प्रोग्राम में चुने जाने पर बधाई दी.
उदयन शालिनी फेलोशिप प्रोग्राम देहरादून चैप्टर के कन्वेनर डॉ विमल डबराल ने कहा कि हमारे बच्चे सरकारी स्कूलों में अध्यापिका, कॉलेजों में प्रोफेसर से लेकर मेडिकल से टेक्निकल और मैनेजमेंट तक में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. उन्होंने कहा कि कई उदयन केयर फाउंडेशन की एल्युमिनाई विदेशों में रिसर्च और नौकरी भी कर रहे हैं. उन्होंने सभागार में चयनित हुई छात्राओं को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि आप लोग मोतियों की तरह खोजकर लाएं गए हैं जिनमें चमक होती है बस तराशने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि आप लोगों को अपनी शिक्षा के साथ – साथ अपने स्तर पर सामाजिक कार्यों से भी जुड़ना है क्योंकि हम समाज में रहते हैं और समाज के प्रति हम सबकी जिम्मेदारी है. उन्होंने मौजूद छात्राओं को संकल्प लेकर आगे बढ़ने की शुभकामनाएं दी. उन्होंने विपरीत परिस्थितियों में छात्राओं को पढ़ाने और आगे बढ़ाने वाले अभिभावकों को भी धन्यवाद देते हुए उनकी सराहना की.
देहरादून की बेटियों की आंखों में कई सपनें
कार्यक्रम के दौरान अभिभावकों ने संस्था का आभार व्यक्त किया. देहरादून चैप्टर में इस साल बतौर शालिनी चयनित हुई अंजु ने कहा वह पढ़ लिखकर शिक्षिका बनना चाहती हैं. उन्होंने बताया कि उनके पिता राजमिस्त्री है और पढ़ाई बहुत महंगी होती जा रही है लेकिन अब उद्यान शालिनी फैलोशिप प्रोग्राम से जुड़कर वह उन्होंने जिस तरह कक्षा 10 में मेहनत की है, वैसे ही वह आगे बढ़ेंगी. अंजू की तरह हर शालिनी के कई सपने हैं जिनको पंख देने का काम उदयन केयर फाउंडेशन कर रहा है.