- आखिर दयारा बुग्याल से कहां गायब हुई बबीता?
- दो सप्ताह बाद भी नहीं मिला कोई सुराग, रहस्य बनी हुई है ट्रेकर बबीता पांडे की गुमशुदगी
नीरज पाल/इंफो उत्तराखंड
उत्तरकाशी। उत्तराखंड के सबसे खूबसूरत पर्यटन स्थलों में शुमार दयारा बुग्याल इन दिनों अपनी प्राकृतिक सुंदरता नहीं, बल्कि एक रहस्यमयी गुमशुदगी को लेकर चर्चा में है। दयारा बुग्याल ट्रेक के दौरान लापता हुई बबीता पांडे का दो सप्ताह बाद भी कोई सुराग नहीं मिल पाया है। लगातार चल रहे खोज अभियान, हेलीकॉप्टर, ड्रोन, गोताखोरों और आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल के बावजूद खोजी दल खाली हाथ लौट रहे हैं। ऐसे में यह सवाल हर किसी के मन में है, कि आखिर बबीता पांडे कहां गायब हो गई?

स्वर्ग जैसी खूबसूरती, लेकिन चुनौतियां भी कम नहीं
समुद्र तल से लगभग 11 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित दयारा बुग्याल उत्तराखंड के सबसे प्रसिद्ध अल्पाइन घास के मैदानों में से एक है। दूर-दूर तक फैले हरे मैदान, हिमालय की बर्फीली चोटियां और शांत वातावरण इसे देश-विदेश के पर्यटकों की पहली पसंद बनाते हैं। लेकिन इसकी खूबसूरती के पीछे छिपी भौगोलिक जटिलताएं कई बार खतरनाक साबित हो सकती हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार दयारा बुग्याल का विशाल क्षेत्र, घने जंगल, अचानक बदलता मौसम और कोहरे की चादर कई बार ट्रेकर्स को भ्रमित कर देती है। मुख्य ट्रेक मार्ग से थोड़ी दूरी पर भटक जाना भी किसी व्यक्ति को मुश्किल में डाल सकता है।

हाल ही में दयारा बुग्याल ट्रेक से लौटे एक ट्रेकर चिराग बताते हैं, कि यह ट्रेक तकनीकी रूप से बहुत कठिन नहीं माना जाता, लेकिन नए ट्रेकर्स के लिए इसमें जोखिम कम नहीं हैं। कई स्थानों पर गहरी ढलानें, घने जंगल और सुनसान क्षेत्र मौजूद हैं, जहां किसी व्यक्ति का समूह से अलग हो जाना बड़ी चुनौती बन सकता है।

हर संसाधन लगाया, फिर भी खाली हाथ
बबीता पांडे के लापता होने के बाद प्रशासन ने बड़े स्तर पर खोज अभियान शुरू किया। एसडीआरएफ, पुलिस, वन विभाग, स्थानीय प्रशासन और ग्रामीणों की संयुक्त टीमें लगातार क्षेत्र की खाक छान रही हैं।
एसडीआरएफ कमांडेंट अर्पण यदुवंशी के अनुसार खोज अभियान में ऊंचाई वाले क्षेत्रों, जंगलों, नदी-नालों, तालाबों और अन्य जल स्रोतों की भी जांच की जा रही है। गोताखोरों को भी पानी के भीतर तलाश के लिए उतारा गया है, लेकिन अब तक कोई ठोस सुराग नहीं मिला है। खोज अभियान के लंबा खिंचने से यह मामला और अधिक रहस्यमय होता जा रहा है।

गांवों में चर्चा, अटकलों का बाजार गर्म
बबीता की गुमशुदगी ने स्थानीय स्तर पर भी तरह-तरह की चर्चाओं को जन्म दे दिया है। कोई दुर्घटना की आशंका जता रहा है, तो कोई अन्य संभावनाओं पर सवाल उठा रहा है।
क्षेत्र के पूर्व प्रधान महेंद्र पोखरियाल का कहना है, कि बिना किसी साक्ष्य के हत्या या शव को दफनाने जैसी बातें केवल अटकलें हैं। उनका मानना है, कि जब तक कोई ठोस जानकारी सामने नहीं आती, तब तक बबीता को जीवित मानकर खोज अभियान जारी रहना चाहिए।

ट्रेकिंग एजेंसी पर उठे सवाल
जांच के दौरान ट्रेकिंग और कैंपिंग एजेंसी की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हुए हैं। जिला पर्यटन विभाग के अनुसार एजेंसी ने ट्रेक पर गए लोगों का पंजीकरण नियमानुसार नहीं किया था। कई नामों और दस्तावेजों में भी अनियमितताएं पाई गई हैं।
इस गंभीर लापरवाही को देखते हुए संबंधित एजेंसी का लाइसेंस रद्द कर दिया गया है, और विभागीय कार्रवाई जारी है। इस घटनाक्रम ने प्रदेश में ट्रेकिंग गतिविधियों की निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था पर भी बहस छेड़ दी है।

पुलिस हर एंगल से कर रही जांच
उत्तरकाशी पुलिस भी मामले को केवल दुर्घटना के नजरिए से नहीं देख रही है। पुलिस अधीक्षक कमलेश उपाध्याय के अनुसार मामले की जांच के लिए विशेष टीम गठित की गई है। सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल कॉल डिटेल रिकॉर्ड, डिजिटल साक्ष्य और अन्य तकनीकी पहलुओं की बारीकी से जांच की जा रही है। पुलिस का कहना है, कि जांच किसी एक संभावना तक सीमित नहीं है, और हर पहलू पर गंभीरता से काम किया जा रहा है।

रहस्य बरकरार
दो सप्ताह बीत जाने के बाद भी बबीता पांडे का कोई सुराग न मिलना कई सवाल छोड़ रहा है। क्या वह रास्ता भटक गईं? क्या किसी दुर्घटना का शिकार हुईं? या फिर इसके पीछे कोई और कहानी छिपी है? इन सभी सवालों के जवाब फिलहाल खोजी टीमों को भी नहीं मिले हैं।
उत्तराखंड के सबसे सुंदर पर्यटन स्थलों में से एक दयारा बुग्याल आज एक ऐसे रहस्य का केंद्र बन चुका है, जिसका जवाब पूरा प्रदेश जानना चाहता है। जब तक बबीता का पता नहीं चलता, तब तक सबसे बड़ा सवाल यही रहेगा, आखिर दयारा बुग्याल से कहां गायब हुई बबीता?